आयुर्वेद का अर्थ औषधि - विज्ञान नही है वरन आयुर्विज्ञान अर्थात '' जीवन-का-विज्ञान'' है

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मंगलवार, 19 जून 2012

ये बरसात की बीमारियाँ

पिछले वर्ष मैंने बरसात में कीड़ों के काट लेने से होने वाली परेशानियों और व्याधियों के उपचार के बारे में लिखा था .इस साल की बरसात में आप  ये जानें कि तमाम  बरसाती बीमारियों से अपने शरीर की रक्षा कैसे करनी है.

गर्मियां अब जाने के कगार पर हैं . ये गर्मियां कीटाणुओं की दुश्मन भी होती हैं। जो कीटाणु अपनी जान बचा कर बिलों में नहीं घुसते वे तो ख़त्म ही हो जाते हैं. किन्तु बिलों में घुसे हुए कीटाणु इस जाती हुई गरमी में हमारे शरीर के लिए घातक सिद्ध होते हैं और हमें तमाम बीमारियों से परेशान होना पड़ता है.

अब जैसे घमौरियों को ही ले लीजिये ,सबसे पहले कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले शरीर पर घमौरियों का ही आक्रमण होता है और बच्चा क्या जवान और बुजुर्ग भी इससे परेशान हो जाते हैं। ऐसे समय हमें कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए और कुछ चीजों का भोजन में प्रयोग बढ़ा देना चाहिए  जैसे आपको जीरा ज्यादा से ज्यादा खाना चाहिए , जीरे से शरीर को ठंडक पहुंचती है और ये पाचन क्रिया पर अटैक करने वाले कीटाणुओं  को पेट में ही ख़त्म कर देता है। जीरे का पानी उबाल कर रख लीजिये ,इस पानी का 50 ग्राम आप सुबह नहाने के पानी में मिला दीजिये ,घमौरियों और फोड़े-फुंसी से राहत मिलेगी। नहाने के पानी में रोजाना फिटकरी का एक टुकड़ा घोल दीजिये ,घमौरियां और फुंसियां जल्दी ख़त्म होंगी। पुदीना पीस कर उसे साबुन की तरह बदन पर रगड़ डालिए फिर नहाइए। कच्चे आम को भी  पीस कर आप उबटन की तरह या साबुन की तरह  पूरे  बदन पर रगड़ लीजिये तब नहाइए। साथ ही पानी ज्यादा से ज्यादा पीजिये ताकि पेट में गरमी ही न रहे जो घमौरियों और फोड़े- फुंसी के रूप में शरीर से बाहर निकलती है। अगर आपको मिल जाए तो गिलोय का चूर्ण 5 ग्राम रोजाना सुबह सवेरे पानी से निगल लीजिये। ये उमस के इस मौसम में रामबाण की तरह काम करती है।
कुछ और भी सरल उपाय हैं जिन्हें आप प्रयोग कर सकते हैं।
जैसे अजवाइन आप 5 ग्राम सप्ताह में दो बार पानी से निगल लीजिये ,यह भी शरीर को बारिश के  रोगों से बचाती है . 
इसी तरह रोज  ५ पत्तियाँ नीम की भी चबायी जा सकती हैं .
साथ ही बच्चों को २ ग्राम अश्वगंधा का चूर्ण और ५ ग्राम बड़े लोगों को खिलाया जा सकता है ,पानी से भी निगल सकते हैं और शहद मिला कर भी चाट सकते हैं.
बेहद छोटे दूध पीते बच्चों को केवल शहद काली मिर्च के चूर्ण के साथ चटाया जा सकता है .आधा चम्मच शहद में ५ दाने काली अर्थात गोल मिर्च का चूर्ण .
इन सबके बावजूद फिटकरी के पानी से नहाना सर्वाधिक फायदेमंद साबित होगा.    


इन आलेखों में पूर्व विद्वानों द्वारा बताये गये ज्ञान को समेट कर आपके समक्ष सरल भाषा में प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयत्न मात्र है .औषध प्रयोग से पूर्व किसी मान्यताप्राप्त हकीम या वैद्य से सलाह लेना आपके हित में उचित होगा

7 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Ye chote chote ghareloo nuskhe bade Kaam ke hain ...shukriya inke liye ...

Asha Joglekar ने कहा…

बरसाती बीमारी से बचने के कितने सारे उपाय बताये हैं आपने । जीरे वाला सबसे आसान लग रहा है ।
बहुत दिनों में इधर आई इसलिये क्षमा चाहती हूँ । अब पिछली पोस्टें भी पढती हूँ ।

Unknown ने कहा…

पहली बार आपके ब्लॉग पर आया...सचमुच ब्लॉगॉ की भीड़ में एक बेहद उपयोगी पठनीय ब्लॉग

बेनामी ने कहा…

Your blog is very useful for us. We r waiting for ur next nuskhe.

Unknown ने कहा…

Behad shandar jaanlari.... Aapka bahut -2 shukriya

बेनामी ने कहा…

may u help me out??mere puri body pe tils and moles ho gye h..please reply me my mail ID is virusehwag1993@gmail.com
rply soon waiting for ur reply n thnx in advance.

बेनामी ने कहा…

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